इलाहाबाद हाई कोर्ट 69000 शिक्षक भर्ती पर आज से रोज सुनवाई करेगा, दिवाली से पहले मिलेगा तोहफा

लखनऊ। कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने शिक्षक भर्ती का सच उजागर करने वाली प्रयागराज की ऊषा यादव को दिवाली से पहले बड़ी राहत मिलने वाली है। उन्होंने कहा-शिक्षक भर्ती का इंतजार है। कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो चुकी हूं, अब उनकी परेशानी जल्दी दूर होने वाली है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ अब 69000 शिक्षक भर्ती मामले में मंगलवार से रोज सुनवाई करेगी। इस मामले में फैसला दशहरा के बाद आने की उम्मीद है। जिससे इस केस से शिक्षकों को दिवाली से पहले तोहफा मिलेगा।उत्तर प्रदेश में 69000 पदों पर शिक्षक भर्ती मामले में अब इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच रोज सुनवाई करेगी। हाई कोर्ट ने इस केस की बेंच में भी बदलाव किया है। इसमें न्यायमूर्ति जसप्रीत की जगह न्यायमूर्ति इरशाद अली को शामिल किया गया है। रोज सुनवाई होने के कारण माना जा रहा है कि सभी पक्षों को आठ अक्टूबर से पहले सुन लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने 19 सितंबर को निर्देश दिया था कि उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले में 24 से रोज सुनवाई होगी।बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए जनवरी में परीक्षा कराई गई थी। लिखित परीक्षा हुए 9 महीने हो गए हैं फिर भी चार लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है। परीक्षा के बाद सरकार ने भर्ती का कटऑफ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 65 प्रतिशत व आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत की अनिवार्यता के साथ तय कर दिया। शिक्षक भर्ती में 69000 भर्तियों में अर्हता अंकों को लेकर मामला लखनऊ बेंच में है। इससे पहले 19 सितम्बर की तारीख दी गई थी। इस भर्ती की परीक्षा जनवरी में हुई थी लेकिन अर्हता अंकों को लेकर मामला हाईकोर्ट में चला गया। इस मामले में राज्य सरकार हाईकोर्ट गई है लेकिन इसकी लचर पैरवी को लेकर अभ्यर्थी नाराज हैं। अब नाराज अभ्यार्थी चाहते हैं कि लखनऊ बेंच में होने वाली सुनवाई में महाधिवक्ता की उपस्थिति सुनिश्चित कराए। इसके अलावा उनकी यह भी मांग है कि सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखें।  इनकी मांग है कि सरकार न्यायालय के अंतरिम आदेश पर आरक्षित वर्ग के लिए 60 और अनारक्षित वर्ग के लिए 65 फीसदी पासिंग मार्क पर भर्ती अतिशीघ्र पूरी करवाकर शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थियों को मानसिक अवसाद से मुक्त कराएं। इस आदेश को लेकर अभ्यार्थियों ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि सरकारी नियमों के हिसाब से भर्ती के लिए डाली गई याचिका पर सुनवाई हो और महाधिवक्ता हर सुनवाई में मौजूद रहें।