खेल डेस्क. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व अंपायर साइमन टॉफेल ने आईसीसी से अंपायरों के एलीट पैनल का ढांचा सुधारने को कहा है। टॉफेल के मुताबिक, इस पैनल में एक भी भारतीय अंपायर नहीं है। उन्हें उम्मीद भी नहीं है कि निकट भविष्य में कोई भारतीय इस पैनल में आ पाएगा। क्योंकि एक विश्व स्तरीय अंपायर तैयार करने में कम से कम 10 साल लगते हैं। इसलिए अंपायर चयन प्रक्रिया में ढांचागत सुधार किए जाने चाहिए।
टॉफेल ने 2012 में अंपायरिंग से संन्यास ले लिया था
इस पैनल में 2015 से सुंदरम रवि एकमात्र भारतीय अंपायर थे। उन्हें इसी साल निकाल दिया गया। रवि ने एशेज समेत 33 टेस्ट, 48 वनडे और 18 अंतरराष्ट्रीय टी-20 में अंपायरिंग की है। एस वेंकटराघवन के बाद 53 साल के रवि एलीट पैनल में शामिल होने वाले दूसरे भारतीय अंपायर थे।
टॉफेल ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा, ''मुझे याद है हमने भारत में 2006 से 2016 तक एक प्रोग्राम शुरू किया था। तब सिर्फ एक अंपायर एस रवि को तैयार कर एलीट पैनल में लाने में 10 साल लग गए थे। इसलिए उनको (बीसीसीआई) भी इस बारे में सोचने की जरूरत है। उन्हें अंपायर की जरूरत है। सौरव गांगुली (बीसीसीआई के नए अध्यक्ष) सही रास्ते पर लगते हैं, जब वे घरेलू क्रिकेट को मजबूत करने की बात करते हैं। मुझे उम्मीद है कि अंपायर भी इस प्रोग्राम का हिस्सा होंगे।''
टॉफेल ने कहा, ''यह इस बारे में नहीं है कि वह अच्छा काम कर रहे हैं या नहीं। चयन प्रक्रिया मेरिट के आधार पर होना चाहिए। क्यों हमें वनडे और टेस्ट में अलग-अलग नियमों की जरूरत है? हमें दोनों फॉर्मेट्स के बीच समान क्यों नहीं चलना चाहिए?'' वनडे और टी-20 में फील्ड अंपायर में मेजबान देश से होता है, जबकि दूसरा निष्पक्ष होता है।
टॉफेल को इस शताब्दी का बेस्ट अंपायर माना जाता है। उन्हें पांच बार आईसीसी अंपायर ऑफ द इयर का अवॉर्ड मिल चुका है। टॉफेल ने 74 टेस्ट और 174 वनडे और 34 टी-20 में अंपायरिंग की थी। उन्होंने 2012 में अंपायरिंग से संन्यास ले लिया था। उन्होंने 1999 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मैच में अंपायरिंग की।